दिवाली 2025 कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, धनतेरस, गोवर्धन और भाई दूज की पूरी लिस्ट

दिवाली 2025 की सही तारीख और अमावस्या तिथि

दोस्तों, आज इस Post में हम जानेंगे साल 2025 में दिवाली कब है? 20 या फिर 21 अक्टूबर। साथ ही जानेंगे पूजा का शुभ मुहूर्त, धनतेरस, गोवर्धन पूजा और भाई दूज कब है। दीपावली का त्यौहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान राम जी 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, जिसकी खुशी में नगरवासियों ने दीप जलाए थे।

दिवाली का पर्व पांच दिनों तक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, तीसरे दिन दिवाली, चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवें दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस साल अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 3:44 बजे से शुरू होगी और 21 अक्टूबर 2025 को शाम 5:54 बजे समाप्त होगी। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का समय रात 7:08 से 8:18 बजे तक रहेगा।

दिवाली 2025 की सभी तिथियाँ और शुभ मुहूर्त

  • Dhanteras 2025 → 18 अक्टूबर
  • Kali Chaudas / Narak Chaturdashi 2025 → 19 अक्टूबर
  • Diwali 2025 → 20 अक्टूबर
  • Kartik Amavasya 2025 → 21 अक्टूबर
  • Govardhan Puja 2025 → 22 अक्टूबर
  • Bhai Dooj 2025 → 23 अक्टूबर

शुभ मुहूर्त:

  • प्रदोष काल – शाम 5:46 से रात 8:18 बजे तक
  • वृषभ काल – रात 7:08 से रात 9:03 बजे तक
  • निशीथ काल – रात 11:41 से प्रातः 12:31 बजे तक

दिवाली 2025 पर लक्ष्मी पूजन विधि

दिवाली पूजन के लिए सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। दिवाली के दिन मुख्य रूप से माता लक्ष्मी और भगवान गणेश जी का पूजन किया जाता है।

  1. एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
  2. गणेश जी और माता लक्ष्मी जी की मूर्ति चौकी पर रखें। ध्यान दें कि माता लक्ष्मी को भगवान गणेश जी के दाहिने ओर बैठाएं और मूर्तियों का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर हो।
  3. भगवान कुबेर जी, माता सरस्वती और कलश की भी स्थापना करें।
  4. हाथ में लाल या पीले फूल लेकर गणेश जी का ध्यान करें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
  5. माता लक्ष्मी को लाल सिंदूर का तिलक लगाएं और श्रीसूक्त का पाठ करें।
  6. देवी सरस्वती, माता काली, भगवान विष्णु और कुबेर देवता का पूजन करें।
  7. धूप, दीप और मिठाई से भोग लगाकर आरती करें।

महालक्ष्मी पूजन पूरे परिवार को एकत्रित होकर करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दोस्तों, उम्मीद है कि यह Post आपको पसंद आई होगी। अगर हाँ, तो कमेंट बॉक्स में जय माता दी ज़रूर लिखें।

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