इंदिरा एकादशी 17 सितंबर 2025 के दिन तुलसी जी की महिमा: घर में क्यों जरूरी है तुलसी, प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार जानें रहस्य

तुलसी जी की महिमा और महत्व

जिसे एकादशी व्रत रहना हो उसका नियम है कि प्रतिदिन तुलसी जी की भक्ति करें। तुलसी का पौधा लगाना, उसका सिंचन करना, तुलसी जी को तिलक लगाना, माला पहनाना, परिक्रमा करना और प्रणाम करना – यह सब करने से मनुष्य को अनंत पुण्य मिलता है। तुलसी जी की सेवा करने वाला सदैव भगवान श्रीकृष्ण के समीप रहता है।

जब तक तुलसी की शाखा, पत्ते और पुष्प सुशोभित रहते हैं, तब तक उसका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता। तुलसी जी का वन लगाना और उनके पत्तों से श्रीहरि की पूजा करना करोड़ों कल्पों तक स्वर्गीय फल प्रदान करता है।

तुलसी जी की सेवा और पूजन विधि

तुलसी जी का पूजन करते समय पहले प्रार्थना करनी चाहिए – “हे वृंदा देवी, हे तुलसी जी, भगवान श्री हरि की पूजा के लिए हमें आपके पत्ते चाहिए। कृपा करके हमें दीजिए।” बिना अनुमति तुलसी पत्ते तोड़ना उचित नहीं है।

तुलसी दल से श्री हरि की पूजा करने से कोई भी पाप मनुष्य को छू नहीं सकता। इतना ही नहीं, सोना-चांदी दान करने का जो फल होता है, वह भी तुलसी दल अर्पित करने की बराबरी नहीं कर सकता।

विशेष नियम: द्वादशी तिथि को तुलसी दल नहीं तोड़ना चाहिए। इस दिन केवल तुलसी को प्रणाम करें।

तुलसी जी के घर में होने का महत्व

जिसके घर में तुलसी का पौधा होता है, वहाँ यमराज प्रवेश नहीं करते। वह घर तीर्थ के समान माना जाता है। तुलसी जी का दर्शन, स्पर्श, जल अर्पण और सेवा करने से मनुष्य के पाप क्षमा हो जाते हैं।

तुलसी काष्ट से बना चंदन धारण करने से भी पाप नष्ट होते हैं। तुलसी की छाया पितरों को तृप्ति प्रदान करती है। तुलसी को घर के आंगन या बालकनी में उचित स्थान देकर विराजमान करना चाहिए।

तुलसी माला और नाम जप का महत्व

जो व्यक्ति तुलसी की माला से नाम जप करता है, उसे शीघ्र आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त होती है। तुलसी माला से जप करने में जो शक्ति और ऊर्जा मिलती है, वह प्लास्टिक या किसी अन्य माला से संभव नहीं है।

छोटी “सुमिरनी” माला जेब में रखकर नाम जप करना भी लाभकारी है। नाम जप करने से मनुष्य के हृदय में आध्यात्मिक शक्ति जागृत होती है और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति प्रबल होती है।

तुलसी जी – श्रीकृष्ण की प्रिय

तुलसी जी को भगवान श्रीहरि की प्रिय माना गया है। जो तुलसी की माला पहनता है, श्रीकृष्ण उसके वश में हो जाते हैं। तुलसी का सेवन करने से श्रीकृष्ण की महिमा का अनुभव होता है और आत्मा को पवित्रता प्राप्त होती है।

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