EV लेने से बच सकते हैं पैसे? जानिए India में Electric Cars के Hidden Costs!

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के छुपे हुए खर्चे: EV Hidden Costs Explained

EV Hidden Costs Explained – दोस्तों, EV लेने के फायदे काफी हैं, लेकिन क्या पैसे बचाना सच में फायदा है? आइए जानते हैं इलेक्ट्रिक वाहनों के छुपे हुए खर्चों के बारे में। सबसे पहले बात होती है जब आप EV खरीदने जाते हैं। खरीदने के बाद आपको पता चलता है कि इसमें दो चार्जिंग ऑप्शन आते हैं – घर पर लगाने के लिए। अलग-अलग कंपनियां यही करती हैं।

इसमें 3.2 kW और 7.2 kW का AC चार्जर आता है। आप सोचते हैं कि टॉप एंड मॉडल लूंगा तो 7.2 kW का चार्जर फ्री मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। आपको इसे लगभग ₹50,000-60,000 प्लस टैक्स के साथ अलग से खरीदना पड़ता है।

घर पर चार्जिंग और इंस्टॉलेशन खर्च

अगर 3.2 kW वाला चार्जर लेते हैं तो चार्जिंग टाइम लंबा होगा 10-12 घंटे तक। वहीं 7.2 kW या फास्ट चार्जर से भी 6-8 घंटे लगते हैं। इसके अलावा, कई बार आपका घर का बिजली मीटर पर्याप्त पावर सप्लाई नहीं कर पाता। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में MSEB को अपग्रेड करने के लिए अतिरिक्त पैसे देने पड़ते हैं। इंस्टॉलेशन और वायरिंग के लिए भी अतिरिक्त खर्च आता है। अगर आप सोसाइटी में रहते हैं तो पार्किंग एनओसी लेना पड़ेगा, और इसके लिए अलग से चार्ज देना पड़ता है। कुल मिलाकर चार्जर इंस्टॉलेशन में ₹45,000-50,000 तक खर्च आ सकता है।

पब्लिक चार्जिंग के खर्चे

जब तक घर पर चार्जर नहीं लगाते, पब्लिक चार्जिंग का उपयोग करना पड़ता है। पब्लिक चार्जिंग का खर्च ₹19 प्रति kWh या यूनिट तक हो सकता है। उदाहरण के लिए, 40 kWh बैटरी चार्ज करने में ₹760-800 खर्च आएगा। फास्ट चार्जर के लिए अलग-अलग कंपनियों के चार्जिंग सिस्टम और ऐप्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। इसमें वॉलेट में पैसा रखना पड़ता है और कई बार मिनिमम बैलेंस की शर्त होती है।

बैटरी की डिग्रेडेशन और मेंटेनेंस

EV की बैटरी ओवर टाइम डिग्रेड होती है। ज्यादा फास्ट चार्जिंग से बैटरी जल्दी खराब हो सकती है। घर पर सही तरीके से चार्ज करने से ये प्रॉब्लम कम होती है। बैटरी खराब होने पर 2-5 लाख का खर्चा पड़ सकता है। कोल्ड वेदर में EV की रेंज कम हो सकती है। लंबी ट्रिप पर चार्जिंग टाइम ज्यादा लग सकता है।

इन्श्योरेंस, वारंटी और सॉफ्टवेयर फीचर्स

EV की इन्श्योरेंस प्रीमियम पेट्रोल/डीजल वाहनों की तुलना में ज्यादा होती है। वारंटी खत्म होने के बाद सर्विस सेंटर में गाड़ी लंबे समय तक रह सकती है। कई कंपनियां सॉफ्टवेयर फीचर्स के लिए एक्स्ट्रा चार्ज लेती हैं। OTA प्लेटफॉर्म और अपडेट्स भी अतिरिक्त खर्च में आते हैं।

EV की सेकेंड-हैंड वैल्यू और डेप्रिसिएशन

EV की resale value पेट्रोल/डीजल वाहनों की तुलना में कम हो सकती है। बैटरी की कंडीशन और चार्जिंग हिस्ट्री resale price को प्रभावित करती है। इस पोस्ट में हमने EV के छुपे हुए खर्चों, चार्जिंग खर्च, बैटरी डिग्रेडेशन, इन्श्योरेंस, वारंटी और सेकेंड-हैंड वैल्यू के बारे में विस्तार से बताया।

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