Co-Location योजना: अब आंगनवाड़ी और स्कूल एक साथ – बच्चों को मिलेगा पढ़ाई + पोषण

आंगनबाड़ी और प्राथमिक विद्यालय कोलोकेशन: नई गाइडलाइन 2025

Co-Location योजना – महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए ये दिशा-निर्देश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सह-स्थान (Co-location) प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने का रोडमैप प्रदान करते हैं।

आज के इस अवसर पर माननीय महिला एवं बाल विकास मंत्री भारत सरकार श्रीमती अन्नपूर्णा देवी जी और शिक्षा मंत्री आदरणीय श्री धर्मेंद्र प्रधान जी उपस्थित रहे। शिक्षा विभाग के सचिव श्री संजय कुमार, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव श्री अनिल मलिक, अवर सचिव अर्चना अवस्थी, लव अग्रवाल सहित शिक्षा एवं महिला-बाल विकास विभाग के अधिकारी गण और प्रेस मीडिया भी मौजूद रहे।

NEP 2020 और Early Childhood Education की दिशा में बड़ा कदम

माननीय प्रधानमंत्री जी हमेशा कहते हैं कि 21st Century Skills को बढ़ावा देना ज़रूरी है। इसी सोच का परिणाम है कि 34 वर्षों के बाद आई नई शिक्षा नीति (NEP 2020) बच्चों को भाषा, खेल-खेल में शिक्षा और स्किल डवलपमेंट के अवसर प्रदान करती है।

Early Childhood Care and Education (ECCE) पर विशेष बल दिया गया है क्योंकि रिसर्च बताती है कि 6 वर्ष की उम्र तक बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85% विकास हो जाता है। इसीलिए शुरुआती वर्षों में सही पोषण और सीखने का वातावरण देना बेहद आवश्यक है।

आंगनबाड़ी और विद्यालय का एकीकृत मॉडल

भारत में लगभग 14 लाख 20 हजार आंगनबाड़ी केंद्र और 96 हजार प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें से करीब 2 हजार पहले से ही Co-located हैं। अब इस पहल को तेज़ी से बढ़ाने के लिए समान नियम और ऑपरेशनल क्लैरिटी पर ज़ोर दिया गया है।

इस दिशा-निर्देश के तीन प्रमुख लक्ष्य रखे गए हैं:

  1. हर बच्चा आंगनबाड़ी से सहजता से कक्षा 1 में प्रवेश पा सके।
  2. आंगनबाड़ी और प्राथमिक विद्यालयों के बीच समन्वय बढ़ाकर Joyful Learning और Play-Based Activities से बच्चों का समग्र विकास हो।
  3. प्राथमिक स्तर पर मजबूत नींव के साथ हर बच्चा बिना रुके उच्चतर कक्षाओं तक पहुँचे और सफलता हासिल करे।

महिला सशक्तिकरण और परिवार की भागीदारी

यह पहल केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि कामकाजी महिलाओं को भी सीधी राहत देती है। आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ Crèches चलाने से महिलाएं अपने बच्चों की देखभाल के साथ-साथ आजीविका भी जारी रख सकती हैं। इससे न केवल परिवार बल्कि देश की उत्पादकता को भी मजबूती मिलती है।

साथ ही, बच्चों के पहले शिक्षक के रूप में परिवार और माता-पिता की भागीदारी भी बेहद ज़रूरी है। समुदाय-आधारित भागीदारी से यह योजना और मज़बूत होगी और बच्चों के लिए एक Child-Friendly Campus तैयार होगा।

विकसित भारत की ओर एक सशक्त कदम

आज का यह कार्यक्रम केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण और संस्कारों का भी संगम है। आंगनबाड़ी और विद्यालय का एकीकृत ढांचा बच्चों के लिए सुरक्षा, ज्ञान और पोषण का उपयुक्त वातावरण प्रदान करेगा।

यह पहल माननीय प्रधानमंत्री जी के 2047 के विकसित भारत (Viksit Bharat) के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत नींव है। आने वाले समय में यह सुनिश्चित करेगा कि भारत का हर बच्चा सुपोषित, शिक्षित और आत्मनिर्भर बने।

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