शारदीय नवरात्रि में देवी स्वरूप वृक्ष और उनके अद्भुत लाभ
दोस्तों, जय माता दी। हिंदू धर्म में देवी माता रानी के अनेक स्वरूप बताए गए हैं, जिनमें वृक्षों को भी माता के रूप में माना गया है। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर कुछ ऐसे पेड़ हैं जिन्हें छूना बेहद शुभ माना गया है। इन वृक्षों को छूने से शत्रु दोष, कर्ज दोष और गरीबी दोष समाप्त होते हैं।
शारदीय नवरात्रि के समय में ये पेड़ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्व रखते हैं बल्कि साइंस के अनुसार भी मनुष्यों के लिए फायदेमंद हैं। पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करके हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और नकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर सोखते हैं।
नवरात्रि में छूने योग्य तीन प्रमुख देव वृक्ष
1. बेल का पेड़ (Bel Tree)
बेल का पेड़ माता पार्वती के पसीने से उत्पन्न माना गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, इसके पत्तों में त्रिदेवी (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) का वास होता है।
- संध्या काल में बेल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाने से व्यक्ति धनवान, गुणवान और पराक्रमी बनता है।
- बेल के तीन पत्तों में हरि ओम लिखकर चढ़ाने से मनोकामना की पूर्ति होती है।
- जड़ में दूध, सिंदूर या तिल चढ़ाने से रोग, गरीबी और दुर्भाग्य समाप्त होते हैं।
- तांबे की अंगूठी को जड़ में रखने से शनि और राहु का दोष नहीं सताता और स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है।
2. शमी का पेड़ (Shami Tree)
शमी का पेड़ जगदंबा का स्वरूप माना जाता है।
- संध्या काल में इसके नीचे धूप दीप जलाने से सभी प्रकार की परेशानियाँ दूर होती हैं।
- लाल चूड़ी या सिंदूर डालने से मनोकामना और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
- शारदीय नवरात्रि में इस पेड़ की जड़ की मिट्टी से स्नान करने से भाग्य चमकता है।
- मंत्र “मम मनोरथ है, पूरे मम दरिद्र नाश” बोलते हुए शमी के पेड़ को छूने से बंद किस्मत के ताले खुल जाते हैं।
3. पारिजात का पेड़ (Parijat Tree)
पारिजात का पेड़ लक्ष्मी माता का स्वरूप माना जाता है और समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ था।
- इसके पेड़ को छूने से थकान, सुस्ती और शरीर की पीड़ा दूर होती है।
- घी का दीपक जलाना और चुटकी भर सिंदूर डालना मनोकामना की पूर्ति करता है।
- शारदीय नवरात्रि में इस पेड़ की पूजा करने से गृह दोष, पितृ दोष और लक्ष्मी दोष समाप्त होते हैं।
नवरात्रि में धारण करने योग्य शक्तिशाली जड़ें
शारदीय नवरात्रि में पाँच जड़ें विशेष लाभकारी मानी जाती हैं। इन्हें नवरात्रि में लाकर पूजा करने और दशहरे के दिन ताबीज में धारण करने से जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता आती है।
1. चमेली की जड़ (Jasmine Root)
- दिव्य शक्तियों से भरपूर, हनुमान जी की कृपा देती है।
- निरोगी रहने और मंत्र सिद्धि में लाभकारी।
- नवरात्रि में नौ दिन तक पूजा करने के बाद ताबीज में धारण करें।
2. अपामार्ग/लटजीरा (Apamarg Root)
- शत्रु नाश और वशीकरण में लाभकारी।
- आध्यात्मिक उन्नति और बंद किस्मत के ताले खोलने में मदद करता है।
- दशहरे के दिन ताबीज में धारण करें।
3. बरगद की जटाएं (Banyan Root)
- देव वृक्ष के रूप में माना जाता है।
- आध्यात्मिक रूप से तरक्की और बंद किस्मत खोलने में मददगार।
- नवरात्रि में पूजा करने के बाद पहनें।
4. सफेद मदार की जड़ (White Madar Root)
- भगवान गणेश का रूप, रिद्धि, सिद्धि, शुभ लाभ के लिए आवश्यक।
- नवरात्रि में पूजा कर 10वें दिन ताबीज में धारण करें।
5. अपराजिता की जड़ (Aparajita Root)
- देवी लक्ष्मी को प्रिय, धन, यश और सफलता के लिए अत्यंत लाभकारी।
- ताबीज में पहनने से बंद किस्मत खुलती है और लक्ष्मी की कृपा आती है।
नवरात्रि में पेड़-पौधों की पूजा और लाभ
- पेड़-पौधे न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि औषधीय और मानसिक लाभ भी प्रदान करते हैं।
- पीपल, तुलसी और अन्य देव वृक्षों में अलौकिक शक्तियाँ निहित हैं।
- नवरात्रि में इन जड़ों को धारण करने से बंद किस्मत के ताले खुलते हैं और सफलता प्राप्त होती है।
- रत्नों की बजाय प्राकृतिक जड़ों का उपयोग अधिक सुरक्षित और प्रभावशाली है।
यदि आप माता रानी को अपने घर बुलाना चाहते हैं, तो कमेंट बॉक्स में लिखें: “माता रानी, आपका हमारे घर पर स्वागत है।” जय माता दी!
