एक बड़ी प्रसिद्ध बात है कि सच को छुपाना अक्षम्य अपराध है और झूठ फैलाना भी सच का कत्ल करना है। लेकिन दर्शकों को लुभाने और डराने के लिए भ्रम फैलाया जा रहा है। 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण होगा। यदि इसका असर भारत में दिखाई नहीं देगा, तो इस पर भ्रम क्यों फैलाया जा रहा है?
न्यूज़ चैनल्स का दायित्व है कि वे सच और फैक्ट्स बताएं। इस ग्रहण का भारत में कोई दृश्य प्रभाव नहीं होगा। मुख्य रूप से यह ग्रहण दक्षिणी प्रशांत महासागर, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।
सूर्य ग्रहण का ज्योतिषीय महत्व और भारत पर असर
कुछ लोगों का कहना है कि इसका असर भारत पर भी दिखेगा। लेकिन फैक्ट यह है कि इसका भारत पर कोई प्रभाव नहीं होगा। इसी कारण भारत में सूतक काल लागू नहीं होगा। सूर्य ग्रहण रात्रि 10:59 बजे शुरू होकर सुबह 3:23 बजे समाप्त होगा। यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका में दिखाई देगा, लेकिन भारत में रात होने के कारण इसका कोई दृश्य प्रभाव नहीं होगा।
ज्योतिषाचार्यों ने स्पष्ट किया है कि जहां ग्रहण दिखाई देगा, वहीं इसका वास्तविक प्रभाव होगा। भारत में कोई सूतक काल लागू नहीं होगा। इसलिए पूजा, पाठ और दैनिक कार्य नियमित रूप से किए जा सकते हैं।
सूर्य ग्रहण के प्रभाव और मिथक
ग्रहण को लेकर कई मिथक और भ्रांतियां सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनल्स पर फैलाई जा रही हैं। कुछ लोगों का उद्देश्य केवल अटेंशन और व्यूअरशिप बढ़ाना है। बृहत संहिता में लिखा है: “यत्र ग्रहणम तत्र दोष”। इसका मतलब है कि ग्रहण का प्रभाव केवल वहीं दिखाई देता है जहां यह वास्तविक रूप से होता है।
177 दिनों के अंतराल पर वर्ष में दो बार ग्रहण आता है। अमावस्या को सूर्य ग्रहण और पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण होता है। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल और दुष्प्रभाव भारत में मान्य नहीं हैं।
ग्रहण का विज्ञान और वास्तविक प्रभाव
सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी नहीं आती, तब सूर्य का प्रकाश बाधित नहीं होता। पार्शियल सोलर ईक्लिप्स केवल उस क्षेत्र में दिखाई देता है, जहां इसकी छाया पड़ती है। इस बार ग्रहण कन्या राशि में लग रहा है। सूर्य और बुध की युति होगी और केतु का प्रभाव रहेगा। व्यापार, शिक्षा, मेडिकल और प्रशासनिक क्षेत्रों में ज्योतिषीय दृष्टि से कन्या राशि प्रभावित हो सकती है।
जहां ग्रहण दिखाई देगा, वहां प्राकृतिक घटनाएं जैसे बारिश, तूफान या आग जैसी घटनाएं हो सकती हैं। भारत में इसका कोई वास्तविक प्रभाव नहीं होगा।
निष्कर्ष: भारत में सूर्य ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं
21 सितंबर 2025 को लगने वाला सूर्य ग्रहण केवल ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका में दिखाई देगा। भारत में सूर्य ग्रहण का कोई दृश्य प्रभाव नहीं है। सूतक काल भी लागू नहीं होगा। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से साधना और पूजा पाठ नियमित रूप से की जा सकती है। ग्रहण का असर केवल उस भूभाग में होगा जहां यह वास्तविक रूप से दिखाई देता है। इस ग्रहण को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों से सावधान रहें और विज्ञान और ज्योतिष दोनों के सटीक तथ्यों पर ध्यान दें।